Tuesday, 1 January 2013

चोट

लगती है जब ह्रदय में चोट,
तो आहत होता है तन-मन,
आहत होती है मस्तिष्क की रेखाएँ-
लगती है जब शरीर को चोट
शरीर के हिस्से में होता है घाव ।
पर जब लगती है चोट आत्मसम्मान को -
तो गिरने लगता है आत्मविश्वास -
टूटने लगते हैं मूल्य-
धूमिल होने लगती है आत्मछवि  -
लगती है जब चोट,
समर्पण, वचनबद्धता, ईमानदारी ,
और निष्ठा को-
तो मिटने लगती है ,
सोंच, चिंतन, विश्लेषण,
पर धोखा , फरेब, जालसाजी
मिटा नहीं सकती इनको -
क्षण मात्र करते हैं इन्हें प्रभावित-
विश्वासों की रंगभरी दुनिया -
बनाते हैं चरित्रों और संबंधों को,
गिरा नहीं सकती,
दुनिया की कोई भी हस्ती इन्हें,
जब चोट बन जाती है चुनौती। 

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