Tuesday, 1 January 2013

भारत की हर बेटियों की सरताज: निर्भया को सस्नेह

कौन कहता है कि -
तुम्हारी इज्ज़त पर लगी है दाग?
तुम्हारी इज्ज़त ने खोली है करोड़ों की आँख ।
तुम्हारे मनोबल ने जगाया है सोने वालों को,
भारत की हर बेटियों की हो तुम शान सरताज |
औरत की  इज्ज़त को जब लोग रखते हैं ताखे पर,
बेचते हैं उसे बाज़ारों में,
तो क्या बच जाता है ?
आदमियत का हो जाता है खात्मा,
मनुष्यता करती है चीत्कार |
इज्ज़त के लुटेरों को कर दो बेनकाब,
बड़े-बड़े तख्तियों के जो हैं मालिक,
क्या कानों में नहीं रेंगती जूँ ?
शर्मिन्दिगी से झुका है हर चेहरा,
दिल्ली, त्रिपुरा, झारखण्ड, मथुरा,  बलात्कार कांड,
रूपम , आयेशा, की  इज्ज़त को मिलाया है मिटटी में,
उनके ही समाज के कर्णधार ।
रहते हैं बड़ी-बड़ी कोठियों, बंगलों में,
उन्हें ऐशो-आराम से फुर्सत कहाँ ?
उन्हें क्या पता, क्या होता है समाज में ?
दिन दहाड़े, रातों में, लुटती है अस्मत,
घर की बेटी लक्ष्मियों का ।
ये तो मस्ती में डूबें हैं यार।
पर रखना याद-
हो रहा है  अनाचार, अत्याचार, बलात्कार,
दसों दिशायें, नक्षत्र, ग्रह, कर रहे हैं चीत्कार।
धरती माता फिर फट जायेगी, होगा भूकंप विकराल।
जगत जननी सीता पर किया है तुमने प्रहार।
फांसी के बदले-
बदलो पुरुषों की सोच, मनोवृत्ति, भावना को,
हर विद्यालयों में लो इसका क्लास |
और बनाओं समाज की हर लड़की को ,
निर्भया, निर्भया, निर्भया |
ताकि बनी रहे हमारें पूर्वजों की परम्परा, संस्कृति, सभ्यता, विशाल ।
जिन्होंने बनाया था -
"यत्र पूज्यन्ते नार्यान, तत्र  देवता रम्यन्ते,"
पुनः परम निर्भया को करती हूँ अर्चना, वंदना एवं क्षमा याचना
तुम हो भारत की हर बेटियों की सरताज । 

Published in Dainik Prabhat on 26th Dec, 2012.

अनोखा रिश्ता

बनाया है आपने एक अनोखा रिश्ता -
जो रिश्तों में बनाता है, एक और रिश्ता।
कहते है आप सदा -
हम पुरे विश्व समुदाय हैं एक दूसरे के रिश्ते,
हमे होता नहीं पता पर जड़ें हैं, इसकी इतनी मज़बूत कि,
इन्डोनेशिया, कलिफ़ोर्निया , टेक्सस, चीन, जापान,
मलेशिया से जोड़ते है हमे ये रिश्ते,
अटूट  अनंत, अखंड।
दिया है आपने एक अदभुत मिशाल ।
तरुमित्र बना अनजान लड़कियों का नैहर ।
देते है आप उन्हें खोइंछा -
बचाते हैं आप भारतीय संस्कृति , सभ्यता, परंपरा को हर क्षण ।
कितना भी कहूँ मैं - फिर भी होगी , छोटी मुँह बड़ी बात ।
आपकी सोंच , संवेदना , चिंतन, मनन ने
किया है मुझें संवेदित ।
हुआ है मेरे मन को,
आपके मर्मस्पर्शी , भ्रातृतुल्य मनोभाव ।
जब तक रहेगा जीवन -
मिलूँगी अवश्य वर्ष में एक बार -
होगा मेरी पुत्रवधुओं का ममहर,
आपका वह तरु-मित्र आश्रम विशाल ।

रजत जयंती का यह पावन अवसर

रजत जयंती का यह पावन अवसर,
किन्तु कुछ तुम भूल मत जाना ।
जा रहे हो चाँद के उस पार,
तो हवाएं चाँदनी लाना,
इसे तुम भूल मत जाना।

जा रहे हो ज्ञान की रश्मियाँ बिखेरने,
तो सत्य की सौदामिनी लाना -
इसे तुम भूल मत जाना।

जा रहे हो इतिहास गढ़ने,
तो अपनी सभ्यता, संस्कृति, निः स्वार्थता को,
जन -जन  और समाज में फैलाना ।
इसे तुम भूल मत जाना।

जा रहे हो शिक्षा का प्रचार प्रसार करने,
तो आदर्श शिक्षकों का माँडल बनाना ,
कर्त्तव्य, निष्ठा, चरित्र का दीपक जलाना,
इसे तुम भूल मत जाना।

जा रहे हो नव-समाज का निर्माण करने,
तो नवचेतना, नवचिंतन, नवविकास के संगीत का धुन बनाना-
इसे तुम भूल मत जाना।

प्रभु से है अनंत विनती , प्रार्थना, मंगल कामना -
बना रहे संत जेवियर्स मील का पत्थर,
गुजरते हुए शिक्षक यात्रियों का बढ़ाता रहे मनोबल।
बनाये उन्हें सार्वभौम, करे चारित्रिक गुणों को विकसित,
सिखाता रहे उन्हें वसुधैव कुटुम्बकम,
चढ़ता रहे सफलतारुपी स्वर्ग की सीढ़ियों पर,
बना रहे अनंत, अजर, अमर।

जा रहे हो क्षितिज के उस पार
तो सुख, शांति, समृद्धि, के अमर गान गाना,
इसे तुम भूल मत जाना।  

चोट

लगती है जब ह्रदय में चोट,
तो आहत होता है तन-मन,
आहत होती है मस्तिष्क की रेखाएँ-
लगती है जब शरीर को चोट
शरीर के हिस्से में होता है घाव ।
पर जब लगती है चोट आत्मसम्मान को -
तो गिरने लगता है आत्मविश्वास -
टूटने लगते हैं मूल्य-
धूमिल होने लगती है आत्मछवि  -
लगती है जब चोट,
समर्पण, वचनबद्धता, ईमानदारी ,
और निष्ठा को-
तो मिटने लगती है ,
सोंच, चिंतन, विश्लेषण,
पर धोखा , फरेब, जालसाजी
मिटा नहीं सकती इनको -
क्षण मात्र करते हैं इन्हें प्रभावित-
विश्वासों की रंगभरी दुनिया -
बनाते हैं चरित्रों और संबंधों को,
गिरा नहीं सकती,
दुनिया की कोई भी हस्ती इन्हें,
जब चोट बन जाती है चुनौती।