Friday, 27 July 2012

डॉ शशि राव द्वारा रचित काव्यांजलि (कविता संग्रह) की प्रतिपुष्टि, श्री सिद्धार्थ रामेश्वरम रंगनाथन, प्रोड्यूसर, ए बी पी न्यूज़, द्वारा दी गयी


" काव्यांजलि की कई कविताएँ पढ़ी, ' विश्वास के फूल ' - कविता एक नया मनोबल पैदा करती है, बिल्कुल वीर रस की कविता की तरह। ' ज़िन्दगी हुई मरुस्थल ' - पढ़कर ऐसा लगा जैसे कवियत्री खुद मरुस्थल की शाम की गवाह रही हो। Gender Equality पर लिखी कविता सामायिक मुद्दे को उठाती है, प्रेरित करती है। ' तरुमित्र ' कविता पढ़कर दिलचस्पी पैदा हुई है, अगर वाकई ऐसा है, तो खूबसूरत है और घूमने योग्य है। ' जीवन का रहस्य ' कविता जीवन की सच्चाई बताती है। ' तुम कहते हो कविता ' रिश्ते के बंधन मुक्त होने की याद दिलाती है। ' पूज्य भाई शंकर दयाल की पावन स्मृति ' में  लिखी गयी कविता मनुष्य की कल पर जीत है। संग्रह बहुत बढ़िया है , जीवन की इस व्यस्तता मैं आज बहुत दिनों बाद कुछ अच्छा पढने को मिला. प्रूफ रीडर या पब्लिशर की गलती से कहीं-कहीं वर्त्तनी गलत हो गयी है, लेकिन उससे कोई फरक नहीं पड़ता क्यूँकि गंगा की बहती अविरल धारा में कविताएँ पाठक को डुबो देती हैं। किताब के लिए धन्यवाद।"